इन 10 बातों से समझें आखिर ईवीएम से छेड़छाड़ क्यों संभव नहीं

विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद विपक्षी दल यह आरोप लगा रहे हैं कि इलेक्शन के दौरान ईवीएम मशीन से छेड़छाड़ करके चुनाव कराए गए हैं। 11 मार्च को नतीजे आने के बाद बसपा सुप्रीमो ने इस बात को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत तक कर दी।

चुनाव आयोग ने मायावती द्वारा लगाए गए आरोप को गलत साबित करते हुए शिकायत खारिज कर दिया। ईवीएम से किसी भी हाल में छेड़छाड़ संभव नहीं है। आज हम आपको बता रहे हैं कि चुनाव आयोग द्वारा बताए गए ईवीएम से जुड़ी 10 बातें जो किसी भी हाल में छेड़छाड़ कर पाना मुमकिन ही नहीं है।

ये हैं ईवीएम से जुड़े वो 10 महत्वपूर्ण बातें…

1. ईवीएम मशीन किसी भी तरह से इंटरनेट से कनेक्ट नहीं होती, ऐसे में इसे ऑनलाइन हैक करना संभव नहीं है।

2. कौन सी ईवीएम मशीन किस पोलिंग बूथ पर रहेगी इस बात का पता पहले से नहीं होता, पोलिंग पार्टी को एक दिन पहले पता चलता है कि उनके पोलिंग बूथ पर कौन से सीरिज़ की ईवीएम आएगी।

3. ईवीएम मशीन दो तरह की होती है। बैलट और कंट्रोल यूनिट। इसके साथ ही एक तीसरी तरह की यूनिट भी अब जोड़ दी गई है इसे VVPAT कहा जाता है।

4. इसमें वोट देने के कुछ सेकेंड के अंदर मतदाता को पर्ची दिखाती है कि उसने किसको वोट दिया है। हालांकि चुनाव आयोग की तरफ से अभी तक इस तरह की मशीन का इस्तेमाल सभी पोलिंग बूथों पर नहीं किया गया है।

5. वोटिंग शुरू होने से पहले ही ईवीएम मशीन को टेस्ट किया जाता है कि मशीन ठीक है या नहीं। ये भी देखा जाता है कि इससे किसी तरह की कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गई है।

6. इस प्रक्रिया को मॉक पोलिंग भी कहा जाता है। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही वोटिंग शुरू करवाई जाती है।

7.  सभी पोलिंग एंजेट से मशीन में वोट डालने को कहा जाता है ताकि ये जांचा जा सके कि सभी उम्मीदवारों के पक्ष में वोट गिर रहा है कि नहीं. ऐसे में यदि किसी मशीन में टेंपरिंग या तकनीकि गड़बड़ी होगी तो मतदान के शुरू होने के पहले ही पकड़ ली जायेगी।

8. मॉक पोल के बाद सभी उम्मीदवारों के पोलिंग एंजेट मतदान केन्द्र की पोलिंग पार्टी के प्रभारी को सही मॉक पोल का सर्टिफिकेट देते है। इस सर्टिफिकेट के मिलने के बाद ही संबंधित मतदान केन्द्र में वोटिंग शुरू की जाती है. ऐसे में जो उम्मीदवार ईवीएम में टैंपरिंग की बात कर रहे हैं वे अपने पोलिंग एंजेट से इस बारे में बात कर आश्वस्त हो सकते है।

9. मतदान शुरू होने के बाद मतदान केन्द्र में मशीन के पास मतदाताओं के अलावा मतदान कर्मियों के जाने की मनाही होती है, वे ईवीएम के पास तभी जा सकते है जब मशीन की बैट्री डाउन या कोई अन्य तकनीकि समस्या होने पर मतदाता द्वारा सूचित किया जाता है।

10. हर मतदान केन्द्र में एक रजिस्टर बनाया जाता है, इस रजिस्टर में मतदान करने वाले मतदाताओं की डिटेल अंकित रहती है और रजिस्टर में जितने मतदाता की डिटेल अंकित होती है, उतने ही मतदाताओं की संख्या ईवीएम में भी होती है। काउंटिंग वाले दिन इनका आपस मे मिलान मतदान केंद्र प्रभारी की रिपोर्ट के आधार पर होता है।

क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट

ऐसा पहली बार नहीं है जब ईवीएम मशीन से छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए हों। सुप्रीम कोर्ट के सामने भी ईवीएम टैंपरिंग के कई मामले आए हैं। लेकिन आज तक कभी भी इस तरह का कोई मामला सही साबित नहीं हुआ।

चुनाव आयोग की तरफ से कई बार आम लोगों को आमंत्रित किया है कि वह खुद चुनाव आयोग जाकर ईवीएम को गलत साबित करने का दावा प्रस्तुत करें लेकिन आज तक इस तरह का कोई भी दावा सही साबित नहीं हो पाया है।

 

source :http://www.livehindustan.com/news/national/article1-ten-facts-that-tempering-is-not-possible-in-evm-machine-739409.html


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