कश्मीरी पंडितों के लिए अलग से कॉलोनी बनाना समस्या का समाधान नहीं

कश्मीर से विस्थापित पंडितों के लिए बनाए जाने वाली अलग कॉलोनी जम्मू-कश्मीर के ताने-बाने को नुकसान पहुंचाएगी। 1990 के दौरान कश्मीर में आतंकवाद और घाटी के हालात पर किताब लिखने वाले संचित गुप्ता ने कहा कि कश्मीरी पंडितों के लिए अलग कॉलोनी से अलगाववाद की भावना और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि कश्मीर समस्या के समाधान के लिए सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करना होगा।

द ट्री विथ ए थाउजैंड एपल्स के विमोचन पर उन्होंने कहा कि जब विचारधाराओं को धर्म और पहचान से सामंजस्य नहीं होता है तो अलगाववाद और पनपता है। इन सब हालात में आम लोगों के साथ बच्चों पर सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव होता है।

संचित गुप्ता ने अपनी किताब में 1990 के उन हालातों का जिक्र किया है जब एक साथ बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित घाटी से विस्थापित हो गए थे। अपनी किताब में 2009 के एक प्रसंग की जिक्र किया है, जब एक 12 वर्ष का मुस्लिम युवक 20 साल के एक भारतीय सेना के जवान के साथ बैठकर चाय पी रहा है। संचित गुप्ताके मुताबिक वो नजारा अपने आपमें बहुत कुछ कहता है।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की समस्या को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। शक्ति के बल पर हम कुछ समय के लिए शांति की बहाली कर सकते हैं।लेकिन स्थायी शांति और सद्भाव के लिए घाटी के स्थानीय लोगों की भावनाओं को समझना पड़ेगा।जम्मू-कश्मीर भारत का अविभाज्य हिस्सा है, और अपने ताज को सुरक्षित रखने के लिए हमें समग्र रूप से विभाजनकारी सोच पर लगाम लगाना होगा।

source :- http://www.jagran.com/news/national-author-says-walls-will-always-divide-resettlement-of-kashmiri-pandits-bad-idea-15558619.html?src=Topic-ART-apple


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