‘मेक इन इंडिया’ से इन सेक्टर्स में आ सकती है बहार

किसी भी देश की अर्थव्‍यवस्‍था उसके आयात और निर्यात पर निर्भर रहती है। आयात कम होगा और निर्यात ज्यादा होगा, तो विदेशी मुद्रा कोष भर जाएगा, जिसका सीधा असर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर पड़ता है। जीडीपी एक अर्थव्यवस्था के आर्थिक प्रदर्शन का एक बुनियादी माप होता है। यह एक वर्ष में एक राष्ट्र की सीमा के भीतर सभी अंतिम माल और सेवाओ का बाजार मूल्य है। इसलिए यदि किसी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है, तो उसके निर्यात को बढ़ाना होता है और आयात को घटना। मोदी सरकार ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत देश के निर्यात को बढ़ाने की दिशा में ही काम कर रही है।

भारत, ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। पहली बार भारत सकल घरेलू उत्पाद के मामले में ब्रिटेन से आगे निकल गया है। भारत का यह सफर आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। मेक इन इंडिया अभियान की भी भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मेक इन इंडिया का मकसद देश को मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाना है। इस अभियान के तहत घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों को मूल रूप से एक अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने का वायदा किया गया है, ताकि 133 करोड़ की आबादी वाले मजबूत भारत को एक विनिर्माण केंद्र के रूप में परिवर्तित करके रोजगार के अवसर पैदा हों। साथ ही देश का निर्यात भी बढ़े, जिससे जीडीपी में इजाफा हो।

निर्यात के मोर्चे पर भारत के लिए अच्छी खबर यह है कि पिछले पांच माह से इसमें लगातार सुधार हुआ है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2016 में निर्यात 5.72 फीसदी बढ़कर 23.9 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले साल दिसंबर में निर्यात 22.6 अरब डॉलर था। पिछले साल के मुकाबले दिसंबर 2016 में इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात में 20 फीसदी, पेट्रोलियम में 8.22 फीसदी और दवाओं के निर्यात में 12.49 फीसदी वृद्धि हुई है। वहीं अप्रैल-दिसंबर के 9 महीने की अवधि में निर्यात 0.75 फीसदी की हल्की बढ़त के साथ 198.8 अरब डॉलर रहा है। जानकारों की मानें तो आने वाले समय में पेट्रोलियम उत्पाद, कीमती आभूषणों और औषधियों के निर्यात से भारतीय अर्थव्यवस्था पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

पेट्रोलियम उत्पा‍द
देश के निर्यात में एक बड़ा हिस्सा पेट्रोलियम उत्पादों का है। लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से होने वाली आय वर्ष 2015-16 में 46 प्रतिशत गिरकर 30 अरब डॉलर पर आ गई। वर्ष 2014-15 में पेट्रोलियम उत्पादों का देश के कुल निर्यात का हिस्सा करीब 18 प्रतिशत था। लेकिन पिछले वित्त वर्ष में कच्चे तेल के दाम गिरने से यह हिस्सा घटकर करीब 12 प्रतिशत पर आ गया। हालांकि इस वित्त वर्ष में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात का प्रदर्शन अच्छा रहने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम पिछले चार महीनों में करीब 80 प्रतिशत तक उछल चुके हैं। ब्रेंट क्रूड का भाव 50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, जबकि जनवरी में यह 28 डॉलर प्रति बैरल था। अगर यह प्रवृत्ति बरकरार रहती है और कच्चे तेल की कीमत 50 से 55 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचती है तो भारत के पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात पर उसका असर जरूर पड़ेगा।

कीमती आभूषण
विश्व में सोने की खदानों से निकालने वाले सोने लगभग 20 फीसद हिस्सा भारत में आयात किया जाता है। इस आयात किए गए सोने में से 75 फीसद का इस्तेमाल कीमती आभूषण बनाने के लिए किया जाता है। इन आभूषणों में से लगभग 30 फीसद निर्यात के लिए तैयार किए जाते हैं। इनका निर्यात अमेरिका, यूएई और सिंगापुर जैसे देशों में होता है। भारत से हर साल लगभग 41 अरब डॉलर के कीमती आभूषण निर्यात होते हैं।

भारत ने औषधियों के निर्यात पर अभी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है। साल 2012-13 में औषधि निर्यात 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हासिल करने में सफल रहा। 2011 से 2015 तक इस सेक्टर में लगभग 51 फीसद की बढ़ोतरी देखी गई है। साल 2015-16 में 12.9 बिलियन यूएस डॉलर की औषधियों का निर्यात भारत से किया गया। यह लगभग 11.4 फीसद की बढ़ोतरी है।

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