शहद ही नही बनाती अब खेती भी कर रही हैं मधुमक्खियां

सुनकर हैरान होना लाजिमी है कि भला शहद देने वाली मधुमक्खियां कैसे खेती कर रही हैं। लेकिन सच है और सौ फीसद सच है। यकीन न हो तो पुणे, अहमदनगर और उसके आसपास के जिलों में जाकर देख आइए।
अपने खेतों में और बागानों में मधुमक्खियों के डिब्बे रखकर किसान घर बैठ जाता है। इससे उसकी पैदावार 50 से 80 फीसद तक बढ़ने लगी है। सबसे ज्यादा असर प्याज और अनार जैसी फसलों पर हुआ है। खेती की इस विधा में न अधिक फर्टिलाइजर देने की जरूरत है और न ही कुछ और। बस खेत व बागान में इनका बसेरा होने भर से पैदावार बढ़ने लगा है।
यह सब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सर्वोत्तम कृषि विज्ञान केंद्र बारामती के वैज्ञानिकों ने कर दिखाया है। दरअसल, परागीकरण वाली फसलों पर यह विधा जादू का काम करती है। अनार के बागान में एक समय पर लगने वाले नर व मादा फूलों के परागों को उसी समय परस्पर फैलानेभर से यह कामयाब होने लगी है। इससे आम के आम गुठलियों के दाम मिलने लगा है। शहद से ज्यादा फायदा फसलों की पैदावार बढाने से हो रहा है। बारामती केवीके ने आसपास के लोगों को मधुमक्खियों के पालन में लगा दिया है, जिससे युवाओं को खूब काम भी मिला है।
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